रामंदिर और राजनिति
राम मंदिर फैसले के बाद राजनितिक बंध होने के दावे किए जा रहे थे। लेकिन राम मंदिर फैसले के बाद राजनितिक शुरू हुई हो एसा लग रहा है। राम मंदिर मे ट्रस्टि चुनने कि उच्च न्यायालय ने सरकार को कमान सोपी है। ईस तोर पर सरकारने पंदरह ट्रस्टि चुने। उसे में एक दलित को सामिल किया है। सामिल करकर सरकार भेदभाव नहीं करती यह देखाना चाह रहीं हैं। पर हकीकत क्या है आप सब जानते है। यह ट्रस्टि पंदरह कब तक रहे गे? उसके बात कौन होगा? उस पर कोई चर्चा नहीं की।
कई साधुसंतने राम मंदिर ट्रस्ट मे सामिल होने के लिए नाराजगी जताई है। योग्य स्थान न मिलने पर सरकार को आंदोलन करने की चिमकी दि है। ईस तरह मंदिर में सरकार का हाथ रहेगा।
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